अनामिका अम्बर

पिछले 15 वर्षों में अपने लेखन और प्रस्तुति के बल पर कई कवि , कवियत्रियों ने मंच पर अपना स्थान सुनिश्चित किया है लेकिन उनमें से कुछ नाम राष्ट्रिय फ़लक पर इतने मशहूर हुए हैं कि आज कवि सम्मलेन के लिए बनने वाली हर टीम से पहले उनके नाम की चर्चा होती है। ऐसा ही एक नाम है अनामिका अम्बर का , लगभग 15 वर्षों के सफर में अनामिका जी ने वो मक़ाम मंच पर हासिल किया है जो उनके समकक्ष किसी और को हासिल नहीं हो पाया। इसकी वजह है उनकी भाषा की आलांकारिक शैली, जहाँ वो कविता में  पारंपरिक श्रृंगार रस का समावेश रखती हैं, वहीँ सामाजिक, राजनितिक, धार्मिक और देशप्रेम से जुड़े पक्ष भी उनकी कलम से कभी अछूते नहीं रहे l  जैसा कि हम जानते हैं कि हिंदी मंच सिर्फ भाषाई कौशल का नाम नहीं  है भाषा के साथ – साथ शब्द का वही अर्थ लोगों तक पहुँचाना जो आप कविता के माध्यम से लोगों तक पहुँचाना चाहते हो , किसी भी मंचीय कवि की वास्तविक कला यही है रस के अनुसार कवि का स्वर बदल जाना चाहिए।   अनामिका जी इस कला में पारंगत हैं वो जिस भी रस की प्रस्तुति मंच पर करती हैं उसी में उनकी मौलिकता नज़र आती है। यही कारण है कि अनामिका जी मंच पर हर रस के विकल्प के रूप में  उपस्थित रहती हैं इन सबसे बड़ी बात यह कही जा सकती है कि उनका मधुर स्वर उनकी प्रस्तुति को कई तरह के स्थाई आयाम प्रदान करता है जिससे कि वो हर तरह के मंच पर स्वीकार्य हैं और सफल हैं l

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