कविता तिवारी

दुनिया में ऐसे उदाहरणों की एक लंबी श्रृंखला है जब किसी कला का स्थानांतरण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हुआ हो वो भी आधिक प्रभावशाली ढंग से कविता के क्षेत्र में भी ऐसे बहुत सारे नाम हैं जिन्हें कविता का माहौल विरासत में मिला लेकिन उन्होंने न सिर्फ उस विरासत को सम्भाला बल्कि उसमें अपनी उपस्थिति अपने तरीके से दर्ज़ कराई  कविता तिवारी का नाम भी उन गिनी चुनी शख़्सियतों में शुमार होता है  उन्होंने परिवार में पनप रही काव्य परंपरा को न सिर्फ आगे बढ़ाया बल्कि राषटीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई , कविता जी के विषय में जो एक बात सबसे ख़ास तौर पर कही जा सकती है वो ये कि उन्होंने मंचीय चकाचोंध में अपने पारिवारिक मूल्यों को गिरने नहीं दिया न ही कविता के स्तर को हल्का होने दिया उनके समकक्ष अन्य कवियत्रियों या तीसरी पीढ़ी की तमाम मंचीय कवियत्रियों में सबसे नया नाम होने के बावजूद उन्होंने अपनी एक प्रभावशाली पहचान मंच पर बनाई है आमतौर पर कवियत्रियों  का विषय श्रृंगार होता है लेकिन कविता जी के विषय सामाजिक , पारिवारिक सरोकारों एवं राष्ट्रीय चेतना से जुड़े हुए होते हैं और जैसा कि आमतौर पर एक धारणा है मंचीय कवियों की प्रस्तुति को लेकर तो कविता जी की मंचीय प्रस्तुति वर्तमान में मंच पर एक कवितामय माहौल पैदा करती है उनका स्वर जब उरूज़ पर होता है तो वह कहीं दिल में गहरे जाकर उतरता है मंच पर उनकी उपस्थिति सुनने वालों में एक सकारात्मक भाव पैदा करती है

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