मनवीर मधुर

ओज कवि और कविता की एक लंबी श्रृंखला है  रामधारी सिंह दिनकर गोपाल सिंह नेगी आदि वाचिक परंपरा के ओज कविता   के वाहक के रूप में जाने जाते हैं उनके बाद ये श्रृंखला वैसे तो बहुत बृहद और लंबी है लेकिन अगर वर्तमान दौर और तीसरी पीढ़ी की बात की जाए तो उसमें जो एक नाम सबसे ऊपर निकल कर आता है वह नाम है मनवीर मधुर का ,  पिछले क़रीब 15 वर्षों से लगातार जो नाम दिन प्रतिदिन बड़ा और प्रभावशाली होता गया है ,ओज कविता के वाहक के रूप में  आज मनवीर मधुर अपनी पीढ़ी में श्रेष्ठ माने जाते हैं विषय चाहे राजनितिक विसंगतियों के हों या देश की सीमाओं पर होने वाली हलचल के मनवीर जी की कलम हमेशा ऐसे विषयों पर तीखा प्रहार करती है बाबा रामदेव के राष्ट व्यापी आन्दोलनों में उनकी  अग्रडी भूमिका रही एक कवि  के रूप में उनकी कलम किसी भी प्रकार की विसंगति पर करारा प्रहार करती है वाचिक परंपरा में कविता लेखन से अधिक महत्वपूर्ण कवि की प्रस्तुति मानी जाती है मनवीर जी ने अपने श्रेष्ठ लेखन के साथ  कविता   की प्रतुति में भी श्रेष्ठता हासिल की है यही कारण है कि आज जब भी किसी मंच पर ओज कवि की डिमांड होती है तो विचारणीय कवियों में मनवीर जी का नाम अग्रणी होता है उनका तेवर और फ्लेवर सबसे जुदा और प्रभावशाली है

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