प्रताप फ़ौजदार

हिंदी मंच का यह यथार्त जग जाहिर है कि पिछले 30 सालों में न सिर्फ़ हास्य की माँग बढ़ी है बल्कि वह हिंदी मंच पर पूर्ण रूप से स्थापित भी हो गया है लेकिन लगभग 12  -15  वर्ष पहले मंचीय हास्य में एक ख़ास तरह का परिवर्तन आया जो पुराने परम्परा वादी हास्य से थोड़ा इतर था वो हास्य जो मंच के आसपास हो रही गतिविधियों से उत्पन्न होता है जिसका कोई पूर्व निर्धारित क्रम नहीं होता इसी तरह के हास्य को क्रिएट करने में जिस कवि को महारत हासिल है उनका प्रताप फौजदार के रूप पूउसमें रा देश और दुनिया जानती है लाफ़्टर चेलेंज के माध्यम से न सिर्फ़ हर घर तक बल्कि हर दिल तक अपनी पहचान बनाई पिछले 12 वर्ष के कविसम्मेलनीय इतिहास को अगर पैमाना मान लिया जाय तो अन्य किसी कवि ने उस स्तर की लोकप्रियता हासिल नहीं की जो प्रताप जी को मिली एक दौर रहा जब प्राइम टाइम में वह किसी न किसी चैनल पर अवस्य मिलते थे वह हास्य के साथ साथ एक पारम्परिक कवि हैं जिनकी कई कविताओं की डिमांड आज भी श्रोताओं के बीच से होती है लेकिन उनकी पहचान पिछले 10 सालों से एक लाफ्टर स्टार के रूप में  दिनोंदिन बढ़ रही है और ये कहना भी अतिसंयोक्ति नहीं होगी कि उनका कोई विकल्प अभी हिंदी मंच के लिए नहीं है

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