kunwar bechain

डॉ कुँवर बैचेन

कुछ लोग अपनी भावाव्यक्ति के लिए कविता को चुनते हैं, लेकिन इसके विपरीत कभी कभी कुछ कवितायेँ मूर्त रूप लेने के लिए व्यक्ति को चुनती हैं। शायद यही कारण है कि कोई बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाला छात्र न सिर्फ कविता लिखना शुरू कर देता है, बल्कि उन कविताओं की प्रस्तुति के साथ कवि सम्मेलन में एक कामयाब कवि के रूप में अपने आप को स्थापित भी कर लेता है। आज न सिर्फ पूरा देश बल्कि पूरी दुनिया उस लाजवाब कवि और लाजवाब इंसान को डॉ कुँवर बैचेन के नाम से जानती है। आज उनके शेरों की एक लम्बी फहरिस्त है जो कवि सम्मेलन के मंचों पर कोट किये जाते हैं, वे एक दो नहीं बल्कि तीन पीढ़ियों के कवि  हैं। हिंदी कविताओं की बहुत सारी विधाओं के साथ कुँवर जी के अनेक संग्रह आ चुके हैं, अनगिनत पीएचडी उन पर हो चुकी हैं इतनी उपल्बधियों के बावज़ूद कभी उनसे मिलो तो लगता है कि वे अभी भी बहुत कुछ सीखना चाहते हैं। यही एक चीज़ उन्हें सबसे ख़ास और सहज बनाती है कवि सम्मेलन के बदलते स्वरुप के बीच भी उनका स्थान शीर्ष पर है, उनको सुनने की चाह रखने वाले घंटों उनका इंतज़ार करते हैं। कवि सम्मलेन से जुड़े बहुत कम लोगों को ये ऐजाज़ हासिल है कि आने वाली हर पीढ़ी किसी को पिछली पीढ़ी से अधिक मुहब्बत करती हो कुवॅर जी उन्हीं में से एक हैं। 

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