राहत इंदौरी

अतीत के झरोखे में भी अगर नज़र डाली जाए तो कुछ गिनती के नाम ही मिलते हैं।  जिन्होंने मुशायरों से कवि सम्मेलन का सफर न सिर्फ तय किया बल्कि वहाँ अपने लिए एक ज़मीन तैयार की और सुनने वालों के दिलों में एक ऐसा मक़ाम बना लिया, कि आज उनके नाम के बिना कवि सम्मेलन की अग्रिम पंक्ति तैयार करना नामुमकिन होगा ,वो नाम है जनाब राहत इंदौरी का। उर्दू मुशायरों का सबसे मक़बूल नाम हिंदी के मंच से अछूता कैसे रह सकता था? जितनी मक़बूलियत उन्हें मुशायरों में मिली, हिंदी मंच पर भी उनके चाहने वालों की तादात कमतर नहीं है। राहत जी के बारे में अगर एक जुमला  इस्तेमाल किया जाए तो वह ये होगा कि ,उनकी ज़ुबान से निकला हर शेर बड़ा हो जाता है, इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उनकी शेरों की अदायगी किस मक़ाम को हासिल  है, वो जब शेर पढ़ते हैं तो शेर का हर लफ्ज़ बोलता है। उनके बारे में एक सच से अगर आप वाक़िफ़ नहीं हैं तो जान लीजिए, उन्होंने लगभग दर्ज़नों  फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं उनके लिखे गीत भी बेहद सफल एवं लोकप्रिय रहे हैं।  पूरी दुनिया में जहाँ जहाँ उर्दू और हिंदी कविता के चाहने वाले रहते हैं वहाँ वहाँ उनको सुनने और चाहने वालों की लम्बी फहरिस्त है। हिंदी और उर्दू दोनों ही मंचों पर उनका सामान अधिकार है, या यूँ कहें कि उनसे मुहब्ब्त करने वाले कहाँ ज़्यादा हैं कहना मुश्किल है। उन्होंने शायरी को हिंदी मंचों पर भी लोकप्रिय बनाया यह उनकी बड़ी उपलब्धि है। 

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